रंग -बिरंगी फूलों भरी उत्तराखंडी संस्कृति
उत्तराखंड एक पहाडी प्रदेश है। यह एक बहुत ही खूबसूरत और शांत पर्यटक केंद्र एवं धर्मिक स्थल है। यह जगह देश के उन चुनिंदा जगहों में शुमार है, जो अपनी सुंदरता के चलते दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करते हैं। यहा की सुंदरता से आशय यहा की सांस्कृतियों , परंपराओं ,रीति -रिवाजो आदि से है। साल के शुरुआत में सबसे पहला त्यौहार फूल संक्रांति गढ़वाली में बोला जाये तो पापड़ी संक्रांत जो चैत के महीने मनाया जाता है। इस महीने कन्याये प्रातः काल उठकर बागीचो से सुन्दर -सुन्दर फूल चुन कर लाती है। और अपने इष्ट देवताओं को चढ़ा कर ,अपने गांव के सभी परिवारों के देहलिंयो पर डालती है।

उत्तराखंड एक पहाडी प्रदेश है। यह एक बहुत ही खूबसूरत और शांत पर्यटक केंद्र एवं धर्मिक स्थल है। यह जगह देश के उन चुनिंदा जगहों में शुमार है, जो अपनी सुंदरता के चलते दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करते हैं। यहा की सुंदरता से आशय यहा की सांस्कृतियों , परंपराओं ,रीति -रिवाजो आदि से है। साल के शुरुआत में सबसे पहला त्यौहार फूल संक्रांति गढ़वाली में बोला जाये तो पापड़ी संक्रांत जो चैत के महीने मनाया जाता है। इस महीने कन्याये प्रातः काल उठकर बागीचो से सुन्दर -सुन्दर फूल चुन कर लाती है। और अपने इष्ट देवताओं को चढ़ा कर ,अपने गांव के सभी परिवारों के देहलिंयो पर डालती है। 
यह कार्य सूर्योदय से पहले किया जाता है। इसी तरह यह गति विधि पुरे एक महीने तक की जाती है। माना जाता है , की इस महीने का सबसे शुभ फूल फ्योली का होता है। इस प्रकार इस त्यौहार को फूल संक्रांति के नाम से भी जान सकते है। एवं इस त्यौहार को ओर आनंदमय एवं रोमांचक बनाने के लिए घरो में पापड़ी एवं दीवारों पर फूल,फल,जानवरो वृछ आदि साज सज्जा के लिए बनाई जाते है। इस प्रकार की साज सज्जा को शुभ माना जाता है. इसमें केवल चावल का प्रयोग कियाजाता है। चावल को एक दिन पहले से पानी में भिगो देते है। एवं चावल के भीग जाने के बाद ओखली पर कुटा जाता है। एवं इसका घोल बनाकर दीवारों पर साज सज्जा की जाती है। इसके साथ साथ हम चावल के घोल को पापड़ी बनाने में इस्तेमाल कर सकते है. इसी प्रकार हम इसे पापड़ी संक्रांत के रूप में जान या मना सकते है।
यह त्यौहार उत्तराखंड या बोला जाये बच्चो का सबसे पसंदीदा त्यौहार होता है।
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